Archive for December, 2007
HAPPY NEW YEAR
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 31, 2007
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भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 28, 2007
एक नज़्म
भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे ,
सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे |
हँसते ही जिसके दिखे एक समंदर सा दर्द का ,
देख जिसे लगे इंतज़ार में एक बुत अपने खुदा के ,
जिसकी सोच समझ जैसे खोई सी लगे ,
जिसकी बातों से ख़ुद तेरी तस्वीर बने ,
बस बिना खोए एक भी पल उसे ,
मेरा नाम लेके मिल लेना ,
वो मैं ना भी हुआ तो कोई ग़म नहीं ,
वो मेरे जैसा हो जाएगा ,
मैं ना सही कोई तो तुम्हे मिल जाएगा |
और अगर याद मेरा नाम भी तब ना आए ,
तो बस अपने नाम से पुकार लेना उसे ,
यक़ीन करो वो मैं हुआ तो एक पल में
पहचान लूँगा , तुम्हे फिर तुमसे माँग लूँगा |
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इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 26, 2007
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
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तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 13, 2007
एक गीत
तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो ,
हम हक़ीकत में एक दिन चले आएगे,
यूँ तुम बिन तो ख़ामोश आवाज़ है ,
तुम से हमको हैं करनी कई बातें पर ,
तुम हमे अपने किस्से सुनाया करो ,
हम तुम्हारे ही क़िस्सों में चले आएगे |
खड़े हैं हर मोड़ पे मुंतजिर से हम ,
कभी तुम जो गुजरो किसी मोड़ से ,
अपनी नज़रो से हर और देखा करो ,
हम तुम्हे वही पे कही नज़र आएगे |
कभी जब लगे तुम को तन्हाई सी ,
या कही पे कभी सुकून ना मिले ,
तुम हमे नाम लेके पुकारा करो ,
हम उसी वक़्त मिलने चले आएगे |
कभी लड़खड़ाते क़दमो से रुक ने लगो ,
तुम मुझे याद कर अपना सहारा बनो ,
और हमसफर हमे बुलाया करो ,
हम साथ तुम्हारा देने चले आएगे |
कभी जब परेशान दुनिया करे ,
या कोई बात तुम्हे सताया करे ,
बेवजह तुम यूँही मुस्कुराया करो ,
हम हँसी तेरी सुन के चले आएगे |
ख़ामोशी में जब लगे घड़ी ग़ुज़ने ,
अंधेरो में जब डूब जाए जंहा ,
तुम अपने घर में ”दीप“ जलाया करो ,
हम तुन्हे उसमे ही रोशन नज़र आएगे |
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सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 11, 2007
सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें ,
तेरी आरज़ू में जिए जा रहा हूँ |
हूँ मदहोश या मैं दीवाना हूँ तेरा ,
तुझे हर तरफ़ हर घड़ी पा रहा हूँ |
भटकता रहा मैं रोशनी में भी लेकिन
अंधेरो में भी अब तुझे पा रहा हूँ |
यूँ चल तो रहा हूँ मगर ना ख़बर हैं ,
मैं कैसे कहाँ और किधर जा रहा हूँ |
मगर इस यकीं पे मैं चल तो रहा हूँ ,
कि हो ना हो तेरे क़रीब आ रहा हूँ |
तुझे पाके तुझको ही मांगता हूँ ,
तेरी दुआ मैं भी चला आ रहा हूँ |
लिखें हैं जो मैने नहीं गीत मेरे ,
तेरी धड़कानो को बस गा रहा हूँ |
वहाँ जागता हैं रातों को तू भी ,
बन के दीप मैं भी जले जा रहा हूँ
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बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 3, 2007
तुझ से मिलने की ख़्वाहिश मेरी कभी कम नहीं होती
मेरे हाथों की लकीरों से , मेरी लड़ाई ख़त्म नही होती
यूँ तो रोशन है दिल का कौना कौना तुझसे ,
कभी तो आ , के तेरे बीन मेरे घर में रोशनी नहीं होती
तुझे तो मिलना है मुझ से मेरे साथ जीना है ,
ये अलग बात के ,खुदा से मेरी जंग ख़त्म नहीं होती ,
यहाँ के दरो-दीवार भी ख़फा रहते है मुझ से ,
ख़ुशबू-ओ -नज़रों की भी शिकायत कम नहीं होती ,
आ मेरे पास कभी यूँ गुन-गुनाता रहूँ तुझ को ,
मेरे ज़ुबान पर तेरी तारीफ़े , कभी ख़त्म नहीं होती
हम जो मिलेगे , ना बिछहड़ेगे कभी फिर से ,
मिलने के बाद , बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती ,
मैने ये कब कहा के तू मेरी साँसे धड़कन ज़िंदगी है ,
मगर तेरे बिन ये मेरी ज़िंदगी , ज़िंदगी नहीं होती
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