लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for November, 2007

देखिए आप हमें यूँ ना सताया कीजे

Posted by hemjyotsana "Deep" on November 30, 2007

देखिए   आप हमें यूँ    ना सताया कीजे
जब भी   दें , आवाज़    चले आया कीजे

कितना आसान है भीड़ में ख़ुद को अकेले रखना ,
तन्हाई में भी तो कभी मिलने आया कीजे 

देखिए आप की रौनक से है ये चाँद सितारे ,
देखता ही मैं रहूँ वो आईना बन जाया कीजे

दिल में बसते हो मगर निगाहों की खता क्या है 
दो घड़ी को चेहरा इनको भी दिखाया कीजे,

सुन के , धड़कन मेरी और बढ़ जाती है ,
नाम मेरा यूँ प्यार से ,  ना पुकारा कीजे ,

आप के दम से है बहारों का चमन ,
काँटों भरे गुल , दिल से ना लगाया कीजे .

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