रिदा बदला ना करो
Posted by hemjyotsana "Deep" on October 23, 2007
साथ रह कर रिश्ता सा बन जाता हैं ,
यूँ बेवजह किताबों की रिदा बदला ना करो |
ये बेबसी मार डालेगी ना मिल पाने की ,
इतने अच्छे क्यूँ हो इतना याद आया ना करो |
बात जो भी हो जैसी भी कहो मुझ से ,
देखो , कुछ भी मुझ से कभी , छिपाया ना करो |
सुन कर मिलने की खलिश और बढ़ती हैं ,
दर्द दिल में होतो हँसती आवाज़ सुनाया ना करो |
कैसे सम्भलेगा मुझ से इतना सब कुछ ,
हँसना रोना ,जीना मरना , नया कुछ सिखाया ना करो|
मेरा कुछ मुझ में भी रहने दो,
अब नया ख्वाब मेरे दिल में जगाया ना करो |
खुल के उड़ने लगता हूँ अपने पिंजरे में ,
हल्का हो जाउ पंछी की तरह , यूँ रुलाया ना करो।
मेरे अश्क ख़ुद तेरी आँखों से गिरने लगे ,
माना तेरा हूँ मगर इतना भी सताया ना करो |
नाम जो चाहो दे दो ,पत्थर भी सही ,
मगर पत्थरों में भी खुदा बनाया ना करो|
कब किसको कितना मिले ?,
बेवजह ही सही ख़ुश रहो ,कोई पल गँवाया ना करो |
एक दिन गिर ना जाउ , तन्हाई में घबराके ,
मुझे इतना उपर भी अकेले बिठाया ना करो |
रोशनी करनी हो तो जलाओ मुझे , दीप हूँ मै,
ख़ुद तुम जल जाओ इतने क़रीब भी आया ना करो |














Raj Yadav said
रोशनी करनी हो तो जलाओ मुझे ,दीप हूँ ,
ख़ुद तुम जल जाओ इतने क़रीब भी आया ना करो |
wah wah…bahut pyaari line hai …kya khoob likha hai aapne…badhai swikaar karein.
समीर लाल said
बहुत बढ़िया, बधाई.
Prem Piyush said
पसंद आयी । ऐसे ही लिखा करो ।
padmesh said
bahut hi khoob ma’am
i would lyk 2 mention one thin
is kavita mein aapki likhi hui har lyn dil ko chhoo jaati hai aur jitni baar bhi padhta hoon ek naya arth samajh mein aata hai……..
Devi Nangrani said
नाम जो चाहो दे दो ,पत्थर भी सही ,
मगर पत्थरों में भी खुदा बनाया ना करो|
Nayaab sher ke liye jitni daad doon kam hai.
YooN tarasha hai usko shilpi ne
Jaan si pad gayi shilaaon mein.
Devi
महावीर said
‘किताबों की रिदा’ में रिदा का रवायती अर्थ ना लेकर लक्षक-शब्द के रूप में
प्रयोग करना बड़ा अच्छा लगा। पूरी रचना स्वरों के संयोग से भी सरस और मधुर
बन गई है। बहुत ख़ूब!
mehhekk said
bahut achi,sab se achi ye lagi hume
Shubhashish Pandey said
मेरे अश्क ख़ुद तेरी आँखों से गिरने लगे ,
माना तेरा हूँ मगर इतना भी सताया ना करो |
kya baat hai , bahut khoob
V said
too good types:)
Tumhe sagar mein keval moti mile, yeh dua hai humari
Fir bhi gujarish hai ki itni gehraiyon mein jaya na karo!
V.