लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

मेरी कविता बोली मुझसे..

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on अक्टूबर 17, 2007

kavita

मेरी कविता बोली मुझसे ,
ओ-निर्माता मेरे ,मुझको ,
ये उम्मीद ना थी तुझसे ,

तुम जब मुझको नए नए शब्दों से सजा रहे थे,
मेरी गहराई कितनी है मुझ को ही बता रहे थे ,

अपने एह्सासो के बल पर ,  तुमने मुझको नए नए रुप दिये ,
सुन्दर सुन्दर स्वप्नों से अब तक ना जाने कितने स्वरुप दिये ,

माना निर्जीव को जान से ज्यादा जान दी तुमने ,
अभिमान से ज्यादा स्वाभिमान दिया तुमने ,

फिर क्युँ ऎसा करते हो  तुम ,
कई जख्म मुझे दें बैठॆ हो तुम ,

फिर भी अब तक खामोश रही ,
 लेकिन बस अब और नहीं ,

माफ किया आज भी तुमको ,
पर फिर ना ऎसा दोहराना ,

रखना मेरे स्वाभिमान का मान ,
कम ना करना अब मेरी जान ,

फिर से तमाशा महफिल में मुझे ना बनाना ,
जो ना समझें उन्हे नही  तुम मुझे सुनाना ,

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17 Responses to “मेरी कविता बोली मुझसे..”

  1. मीनाक्षी said

    सुन्दर अभिव्यक्ति .

  2. बहुत सुन्दर रचना के बधाई. लिखते रहें. शुभकामना.

  3. kakesh said

    अच्छी कविता.

    http://kakesh.com

  4. YE PANKTIYAA BAHUT ACHHI LAGEEE……BADHAAYI

    फिर से तमाशा महफिल में मुझे ना बनाना ,
    जो ना समझें उन्हे नही तुम मुझे सुनाना ,

  5. कविता के जज्बात अच्छे है…………रचना पसंद आई।

  6. Manish said

    कविता को वो जख्म कैसे मिले, उसका मान कैसे कम हुआ इसका खुलासा किसी पंक्ति में नहीं हुआ..बाकी मूल भाव पसंद आया।

  7. नमस्कार ,
    आप सभी की प्रतिक्रिया पढ कर और लिखने की प्रेरणा मिलती है ,
    धन्यवाद

    Manish jee ,
    ये मेरी ही खामी है कि मैं अपनी बात ठीक से नही रख पाई , परन्तु एक और प्रयास करती हूँ .
    कविता को जख्म तब मिलते है जब उसे किसी ऎसे को सुनाया जाये जो उस कविता की कद्र नहीं करके , कोई गलत टिप्पणी कर दे तब कविता का मान कम होता है और उसे जख्म मिलता है.
    ऎसा मेरा सोचना है , जिसके साथ मैने ये पंक्ति लिखी ,

    उम्मीद है आप सभी का सहयोग आगे भी मिलता रहेगा ,
    सादर
    हेम ज्योत्स्ना ’दीप’

  8. balkishan said

    बहुत सुंदर और अच्छी कविता लिखी आपने. पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा. सुंदर शब्द चित्रण और सुंदर अभिव्यक्ति.

  9. Meet said

    आदाब

    बहुत ही अच्छी रचना है. दरअस्ल कविता पढ़ के …. Ok I’ll एक्सप्रेस it in English : There’s more to it than what meets the eyes. मैं blogging की दुनियाँ में अभी अभी आया हूँ. पहली बार पढ़ा आप को. अच्छा लगा. लिखती रहें. अच्छी रचना के लिए बधाई.

    मीत

  10. pavan said

    amazing poetry…
    r u a professional, if not u shud be one.

  11. Hem

    मेरी कविता बोली मुझसे ,
    ओ-निर्माता मेरे ,मुझको ,
    ये उम्मीद ना थी तुझसे ,

    Sunder aagaz hai kavita ka , jaise vo khud sajeev ho uthi.
    Tumhari kalam mein bahut josh hai.

    Devi

  12. भाव-सौंदर्य का चित्रण बड़ी निपुणता और कलात्मक के साथ किया है। सुंदर रचना है।

  13. mehhekk said

    wah kavti boli maza aa gaya,sach kavita ko usse hi sunao jo kavita dil se samajh ta ho

  14. Anamika said

    hello hem..nice poems…keep it up
    all the very best :)

  15. yash1986 said

    nice keep write rajasthani ji

  16. Vinay Sharma said

    hindi ki itni
    ACHCHI Websight
    lambe arse baad dekhi
    banane wale ko “SAADHUWAAD”
    KAVITAEYEN bhi sarahneeye hain

    shubhkamna
    vinay
    Lucknow

  17. aapki kabitake sabhi line bhut achi lagi

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