लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

कत्लें आम किया

Posted by hemjyotsana "Deep" on October 9, 2007

क्यूँ ज़ुबान छीनी मेरी , क्यूँ मुझे बेज़ुबान किया ।
मैंने कब तेरी बेवफ़ाई का चर्चा खुलेआम किया ।

ये माना के मैं निभा ना सका रस्म-ए-उल्फत ,
तुने भी कहाँ - कब , वफ़ा का कोई काम किया ।

इसी से बहल जायेगा दिल नादां ही तो है ,
तेरी गली में करके सज़दे हमने बहुत नाम किया ।

परदे में रखा है तेरा नाम साये को भी खबर नहीं ,
तुने ही बदनाम मुझे , बेवजह सर-ए-आम किया ।

सभी ने लगाये इल्ज़ाम मेरी बेगुनाई पर बहुत ,
कहा तुने भी, दीप ने परवानो का कत्लें आम किया ।

8 Responses to “कत्लें आम किया”

  1. अनिल रघुराज Says:

    परदे में रखा है तेरा नाम साये को भी खबर नहीं,
    तूने ही बदनाम मुझे, बेवजह सर-ए-आम किया।
    …क्या बात है!!

  2. समीर लाल Says:

    बहुत खूबसूरत पेशकश. अच्छा लगा पढ़कर. बधाई.

  3. ramadwivedi Says:

    हेम ज्योत्सना जी,

    बहुत सुन्दर ग़ज़ल पेश की है आपने….. बधाई …लेकिन एक सुझाव है अन्यथा न लें…जरा वर्तनी पर ध्यान दें….वैसे लिखती बहुत अच्छा हो…ये पंक्तिया बहुत अच्छी लगीं…पुन: बधाई…
    परदे में रखा है तेरा नाम साये को भी खबर नहीं ,
    तुने ही बदनाम मुझे , बेवजह सर-ए-आम किया ।

    डा. रमा द्विवेदी

  4. Devi Nangrani Says:

    Hem

    परदे में रखा है तेरा नाम साये को भी खबर नहीं ,
    तुने ही बदनाम मुझे , बेवजह सर-ए-आम किया ।

    Sunder vichaar, sunder abhivyakti.
    Ramaji ki baat mein bhi dam hai.

    Daad ke saath

    Devi

  5. ranjeet Says:

    hi hem
    great lines

    i m ranjeet writer as well , wt u written hats off to this kind og thinking keep writing and add value to the country growth

  6. mehhekk Says:

    loved it

  7. Sameer Bharati Says:

    good job! keep it up! i am also a software professional and a big fan of nice poetry!

  8. Avinash Says:

    main bhi unhi lines ka kayal hua, jinki upper ek -do readers ne tarif ki hai.

    Good

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