ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं
Posted by hemjyotsana "Deep" on October 4, 2007
ज़िंदगी तुझको गुनगुना ना सके ,
मौत को ही ,शब्द दिए जाते हैं .
तेरी यादों में हर पल ए-ख़ुशी
ज़ख़्म ,अश्को से सिये जाते हैं ,
तू तो संग ना चल सकेगा मेरे ,
संग तस्वीर तेरी लिए जाते हैं ,
हाँ , ख़ुशी को तो सुन ना सके ,
ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं ,
कोई भी ना आया जब थे प्यासे ,
अब तो बस अश्क पिये जाते हैं ,
ये दुआ है या ,’दीप’ सज़ा है कोई ,
बस यूँही , बेवजह जिये जाते हैं ,






October 4, 2007 at 5:02 pm
ये दुआ है या ,’दीप’ सज़ा है कोई ,
बस यूँही , बेवजह जिये जाते हैं ,
-उम्दा भाव हैं, बधाई.
October 4, 2007 at 10:45 pm
दिल की आवाज सही शव्दों में ब्लाग पर आई है। आगे भी ऐसी ही रचना की उम्मीद की आशा में………
October 9, 2007 at 8:48 pm
दर्द में भी कुछ बात है ! दीप को कोई सजा न मिले - यही दुआ है ।
November 11, 2007 at 1:04 pm
well tried