लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं

Posted by hemjyotsana "Deep" on October 4, 2007

ज़िंदगी तुझको गुनगुना ना सके ,
मौत को ही ,शब्द दिए जाते हैं .

तेरी यादों में हर पल -ख़ुशी
ज़ख़्म ,अश्को से सिये जाते हैं ,

तू तो संग ना चल सकेगा मेरे ,
संग तस्वीर तेरी लिए जाते हैं ,

हाँ , ख़ुशी को तो सुन ना सके ,
ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं ,

कोई भी ना आया जब थे प्यासे ,
अब तो बस अश्क पिये जाते हैं ,

ये दुआ है या ,’दीप’ सज़ा है कोई ,
बस यूँही , बेवजह जिये जाते हैं ,

4 Responses to “ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं”

  1. समीर लाल Says:

    ये दुआ है या ,’दीप’ सज़ा है कोई ,
    बस यूँही , बेवजह जिये जाते हैं ,

    -उम्दा भाव हैं, बधाई.

  2. अतुल चौहान Says:

    दिल की आवाज सही शव्दों में ब्लाग पर आई है। आगे भी ऐसी ही रचना की उम्मीद की आशा में………

  3. Prem Says:

    दर्द में भी कुछ बात है ! दीप को कोई सजा न मिले - यही दुआ है ।

  4. muskaan Says:

    well tried

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