लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for October 4th, 2007

ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं

Posted by hemjyotsana "Deep" on October 4, 2007

ज़िंदगी तुझको गुनगुना ना सके ,
मौत को ही ,शब्द दिए जाते हैं .

तेरी यादों में हर पल -ख़ुशी
ज़ख़्म ,अश्को से सिये जाते हैं ,

तू तो संग ना चल सकेगा मेरे ,
संग तस्वीर तेरी लिए जाते हैं ,

हाँ , ख़ुशी को तो सुन ना सके ,
ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं ,

कोई भी ना आया जब थे प्यासे ,
अब तो बस अश्क पिये जाते हैं ,

ये दुआ है या ,’दीप’ सज़ा है कोई ,
बस यूँही , बेवजह जिये जाते हैं ,

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