लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for October 1st, 2007

राम कहाँ से लाऊ

Posted by hemjyotsana "Deep" on October 1, 2007

जो युग बीत गया हो उसका अंजाम कहाँ से लाऊ ,
कलयुग मैं रहने वाला हूँ राम कहाँ से लाऊ .
सीता को भी ढूँढा लेकिन मिल ना पाया अब तक  ,
सीता का जो त्याग करें वो राम कहाँ से लाऊ .
कलयुग मैं रहने वाला हूँ राम कहाँ से लाऊ . 
 कुंज कुंज की गलिन गलिन में ,वृन्दावन के वृक्ष वृक्ष में ,
माखन मुरली छोड़ गया जो वो श्याम कहाँ से लाऊ .
शिव शंकर का अंश है आख़िर ,राम के संग रहते है जो,
संकट से हर बार बचायं वो हनुमान कहाँ से लाऊ .
कण कण में विष भरा हुआ हैं ,
राम रहें  जहाँ  इतना पावन धाम कहाँ से लाऊ .
कलयुग मैं रहने वाला हूँ राम कहाँ से लाऊ .

Posted in Blogroll, bharat, deep, desh, ghazal, hemjyotsana, hindi, india, kavita, khuda, life, poems, prashan, raam, ram, shayeri, sher, देश, प्रश्न-उत्तर, भारतीये, राम | Tagged: , , , , , , , | 7 Comments »