आओ मिलाउ मुझको तुम से
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on सितम्बर 6, 2007
आओ मिलाउ मुझको तुम से ,
भीड़ में ना खो जाउ मैं ।
धूल उड़े और धूल में मिलकर ,
धूमिल ना हो जाउ मैं ।।
किससे क्या क्या मिला मुझको ,
किससे क्या क्या पाउ मैं ।
आज मैं कर लूँ सारी बातें ,
जो ना कभी कर पाउ मैं ।।
देर तलक से जाग रहा हूँ ,
नींद कहाँ से लाउ मैं ।
वक्त की आदत रही गुजरना ,
बीता हुआ वक्त कैसे लाउ मैं ।
इस दुनिया से मोह नहीं ,
पर छोड़ इसे क्यूँ जाउ मै ।
हर शहर से भागा नये शहर ,
पर खुद से भाग ना पाउ मैं ।
खोया मैंने कहूँ मैं कैसे ,
मेरा क्या जो खो पाउ मैं ।
मिट्टी का मैं पुतला हूँ बस ,
मिट्टी के सिवा क्या पाउ मैं ।
मिला प्रभु से दिया मुझे सब ,
ख़्वाब की चीजें कैसे लाउ मैं ।
पाकर जिसको चैन हो खोता ,
धन दौलत क्यूँ घर लाउ मैं ।
जो सुना मधुर-अमधुर ,
गीत बना कर गाउ मैं ।
चंचलता भूल चुका मन बेरागी ,
राग कहाँ से लाउ मैं ।
मैं अक्सर लड़ता खुद से ,
पर खुद से जीत ना पाउ मैं ।
एक बिन्दु मात्र हूँ काश ,
मिल मिल बिन्दु से खो जाउ मैं ।
मैं कहाँ हूँ उत्तम पर ,
क्यूँ उत्तम बन ना पाउ मैं ।
मेहनत मैं मरता हूँ नही ,
और उत्तम बनना चाहूँ मैं ।
ऐब पता है मेरे मुझको ,
दूर इन्हें कर ना पाउ मैं ।
मोह अन्धेरे से नहीं पर,
”दीप” कहाँ से जलाउ मैं ।














Annapurna said
कविता अच्छी है।
छठी पंक्ति में मिससे है या किससे एक बार देखें साथ ही प्रभु में वर्तनी सुधार कीजिए
hemjyotsana parashar said
आदरणीय अन्नपूर्णा जी,
धन्यवाद सुधार करवाने के लिये ।
सादर
हेम ज्योत्स्ना “दीप”
समीर लाल said
बहुत सुन्दर रचना, बधाई.
महावीर said
सुंदर कविता है।
धूल उड़े और धूल में मिलकर ,
धूमिल ना हो जाउ मैं ।।
इसमें ‘धू’ का तीन बार बड़ा सुंदर प्रयोग है। कर्ण-प्रिय है।
कितना सत्य हैः
पाकर जिसको चैन हो खोता ,
धन दौलत क्यूँ घर लाउ मैं ।
sahebali said
आप बहुत अच्छा लिखतीं हैं, सुन्दर रचना के लिए बधाई ।
Pavan Bajaj said
Interesting
Raj Yadav said
अब तो आराम करें सोचती आखे मेरी ।
रात का आख़िरी तारा भी जाने वाला है ॥
सायद इसके बहुत करीब है आपकी रचना …बहुत ही सुन्दर रचना ….लिखते रहिए ….अगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा ॥
Prem Piyush said
हेम,
एक बात कहूँ, कविता पढ़कर ऐसा लगा कि, खुद को समझने का उलझन भी तुम्हारा सुलझा हुआ है । दीप जलता रहे – यही कामना है ।
Vikas Dubey said
Aapki rachna aao khud se tumhe milaon me… bahaut hi sunder he….
kitna kuch he chote se jivan me…
main dekh dekh dekha karta…
bheeter se hoti asmanjas
koi saath kabhee na pau me.
kanhi kho na jaon is bheed me ab
aao khud se tumhe milaon me……