लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for September 2nd, 2007

खिज़ां को बुलाने चलो

Posted by hemjyotsana "Deep" on September 2, 2007

हर फ्रिक्र-ए-ज़हां को दिल से भुलाने चलो ।
चलो ख़्वाब में सूकून की  नींद सोने चलो ।

खिज़ा में भी रंगो को याद रखना सदा ,
मौसम-ए-ग़म में भी , खुशी को पाने चलो ।

राहतों के शहर की तलाश में मर ना जाना ,
आफतों के जहां  में ही , घर बसाने चलो ।

खिज़ा के बिन बहार कब आती है भला ,
बहार ना आये , तो खिज़ा को बुलाने चलो ।

ख़्वाहिश हो गर बुलन्द आंसमां छुने की ,
बादलो पर उड़ो , हवाओं को रिझाने  चलो ।

मौसम-ए-तन्हाई में , ये दीप जलता रहे सदा,
यादों की रोशनी से , महफिल सजाने चलो ।

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