लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

दोस्ती हो ही गई-गज़ल

Posted by hemjyotsana "Deep" on August 21, 2007

अदू अदू से ,अदू अदू से हमें दोस्ती हो ही गई ।
रोकते ही रहे, दिल में तू ,तू ही तू हो ही गई ।

समझ में आये हमारे , ये माँजरा ऐसा कहाँ ,
जुदा है तू , और समझ मेरी खो ही गई ।

रोज़ आता है चांद सितारों के साथ लेकिन ,
चांद को भी , दागो की आदत हो ही गई ।

तुझे तो शोक था मुझसे खफ़ा रहने का ,
मुझे भी आज तुझसे शिकायत हो ही गई ।

आज नहीं मैं तुझसे और कहुँगा कुछ ,
तुझे बरसों बाद देख ज़बा बेजुबां हो ही गई ।

अदू तो पास रहते है ,साथ रहते है ,याद तो करते है ,
तुम ना सम्भाल सके ,तुमसे यादें खो ही गई ।

मिलते ही रहे हम से कई बिछड़े हुऐ साथी ,
एक तू है , जो भीड़ में कहीं , खो ही गई ।

तुफान-ऐ-ग़म ने रोका बहुत हमें , मगर ,
खुदा की रहमत से दीप रोशन हो ही गई ।

अदू = दुश्मन

9 Responses to “दोस्ती हो ही गई-गज़ल”

  1. ranjana Says:

    बहुत ख़ूब एक एक शेर दिल को छू गया

    समझ में आये हमारे , ये माँजरा ऐसा कहाँ ,
    जुदा है तू , और समझ मेरी खो ही गई ।

    बहुत ख़ूब

  2. महावीर Says:

    बहुत ख़ूब!
    पहले मिस्रे में लफ़्ज़ों का ख़ूबसूरत इस्तेमाल किया है।
    लफ़्ज़ “उँदू” के बारे में कहना यह चाहूंगा कि यह उर्दू का लफ़्ज़ ‘उँदू’ ना होकर “अदू” है। शायद
    अक्सर सुना होगा कि ‘दुश्मनी’ के लिए ‘अदावत’ शब्द इस्तेमाल होता है।
    ग़ालिब का ये शेर देखिए जिसमें ‘अदू’ इस्तेमाल किया हैः

    यही है आज़माना तो सताना किस जो कहते हैं
    अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तिहां कयूं हो

    मैंने पक्का करने के लिए उर्दू की लुग़ात (डिक्शनरी) में भी देख लिया है।
    सारे अशा’र बहुत पसंद आए। लिखती रहो।

  3. महावीर Says:

    ग़ालिब के शेर में मैंने दो ग़लतियां कर दी, ठीक कर दूं- ( को और क्यूं )

    यही है आज़माना तो सताना किस को कहते हैं
    अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तिहां क्यूं हो

  4. hemjyotsana parashar Says:

    आदरणीय महावीर जी सर,
    बहुत बहुत धन्यवाद ,
    मैने आपकी comment के अनुसार उँदू को अदू कर दिया है ।
    मैंने उर्दू की को तालीम नहीं ली है जितने शब्द सुने बस उन्ही को याद रख कर लिखने की कोशिश करती हूँ ।बचपन से ही जगजीत सिंह जी की गज़लें सुनी आ रही हूँ । उनकी ही एक गज़ल में अदू सुना पर सही तरीकें से लिखना नही आया ।
    आशा है आप आगे भी इसी तरह मेरी कमियाँ बताते रहेगे ।
    सादर
    हेम ज्योत्स्ना

  5. Prem Piyush Says:

    सुंदर रचना है - पर थोड़ी दिक्कत जरूर हूई समझने में ।

    और हाँ, महावीर जी की ऐसी टिप्पणी पढ़कर अंतिम पंक्तियों काफी सही लगती है ।

  6. suruchi Says:

    I think I m not eligible 4 comments

  7. all sed song Says:

    amrit_jaora

  8. Annapurna Says:

    अच्छा लिखती हो ।

  9. nikhil nayak Says:

    आप बहुत अच्छा लिखती है |

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