अदू अदू से ,अदू अदू से हमें दोस्ती हो ही गई ।
रोकते ही रहे, दिल में तू ,तू ही तू हो ही गई ।
समझ में आये हमारे , ये माँजरा ऐसा कहाँ ,
जुदा है तू , और समझ मेरी खो ही गई ।
रोज़ आता है चांद सितारों के साथ लेकिन ,
चांद को भी , दागो की आदत हो ही गई ।
तुझे तो शोक था मुझसे खफ़ा रहने का ,
मुझे भी आज तुझसे शिकायत हो ही गई ।
आज नहीं मैं तुझसे और कहुँगा कुछ ,
तुझे बरसों बाद देख ज़बा बेजुबां हो ही गई ।
अदू तो पास रहते है ,साथ रहते है ,याद तो करते है ,
तुम ना सम्भाल सके ,तुमसे यादें खो ही गई ।
मिलते ही रहे हम से कई बिछड़े हुऐ साथी ,
एक तू है , जो भीड़ में कहीं , खो ही गई ।
तुफान-ऐ-ग़म ने रोका बहुत हमें , मगर ,
खुदा की रहमत से दीप रोशन हो ही गई ।
अदू = दुश्मन













