बेड़ीयाँ बाकी अभी है और भी
Posted by hemjyotsana "Deep" on August 15, 2007
तोड़ चुके जंजीरें कई हम , मगर ,
बेड़ीयाँ बाकी अभी है और भी ।
ना रुको तुम देख ये ऊचाँईयाँ ,
है अभी बाकी मुकाम और भी ।
इन बुलन्दियों पर तो हम आ चुके ,
करने बहुत है काम और भी ।
सिर्फ ये ही नहीं है मज़िलें ,
रास्ता बाकी अभी है और भी ।
दे चुके दुनिया को बहुत ,अब
खुद के लिये पाना है और भी ।
हर तरफ खुशहाली बढ़े ,
कई घर है सजाने और भी ।
दीप युँ तो फैली है रोशनी अपनी ,
करना है नाम देश का और भी ।
Posted in 15-Aug, 26-jan, Blogroll, bharat, desh, ghazal, hemjyotsana, hindi, india, poems, गज़ल, देश, भारतीये, स्वतन्त्रता दिवस, स्वतन्त्रता संग्राम | Tagged: hindi poems, poems in hindi, hem jyotsana parashar, हिन्दुस्तान, लम्हें जिन्दगी के, lamhe jindagi ke | 5 Comments »














