लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for August 15th, 2007

बेड़ीयाँ बाकी अभी है और भी

Posted by hemjyotsana "Deep" on August 15, 2007

तोड़ चुके जंजीरें कई हम , मगर ,
बेड़ीयाँ बाकी अभी है और भी ।

ना रुको तुम देख ये ऊचाँईयाँ ,
है अभी बाकी मुकाम और भी ।

इन बुलन्दियों पर तो हम आ चुके ,
करने बहुत है काम और भी ।

सिर्फ ये ही नहीं है मज़िलें ,
रास्ता बाकी अभी है और भी ।

दे चुके दुनिया को बहुत ,अब
खुद के लिये पाना है और भी ।

हर तरफ खुशहाली बढ़े ,
कई घर है सजाने और भी ।

दीप युँ तो फैली है रोशनी अपनी ,
करना है नाम देश का और भी ।

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