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मेरी कवितायें

गर्व से कहे के हम भारतीय है।

Posted by hemjyotsana "Deep" on August 13, 2007

गर्व से कहे के हम भारतीय है।

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इसे लेख को पढ़े जानने के लिये क्यों ?

तथ्य जो हर भारतीय को गर्व का हकदार बताते है ।

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1) सन माईक्रोसिसटमस (Sun MicroSystems ) के को-फाउंडर विनोद खोसंला
भारतीय है ।
2) पन्टियम चिप ( Pentium ) के निर्माता विनोद धम भारतीय है ।
3)विश्व का तीसरा सबसे अमीर इन्सान लक्ष्मी मित्तल भारतीय है ।( Fortune पत्रिका के अनुसार )
4)बेब आधारित ई-मैल में हाट मैल प्रथम है इसके निर्माता सबीर भाटिया भारतीय है ।
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5)एटी एंड टी बैल लेबोरेटी जहाँ कम्पुटर की भाषा C , C++ , Unix बनी वहाँ के प्रसिडेटं ( President ) अरुन नेत्रावली भारतीय है ।
6)Hewlett Packard के जनरल मैनेजर राजीव गुप्ता भारतीय है ।
7)माइक्रोसाफ्ट के Testing Director of Windows 2000 सजंय तेजवरिका भारतीय है ।
8)सिटी बैकं , Mckensey और Stanchart के Chief Executives क्रमश विक्टोर मेनेजेस , रजत गुप्ता और राना तलवार सभी भारतीय है ।
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9)अमेरीका में 32.2 लाख भारतीय है (1.5% अमेरीका की जनसंख्या)
साथ ही…
38% डाक्टर अमेरीका में , भारतीय है ।
12% वैज्ञानिक अमेरीका में , भारतीय है ।
36% नासा के वैज्ञानिक भारतीय है ।
34% माइक्रोसाफ्ट के कर्मचारी भारतीय है ।
28% IBM के कर्मचारी भारतीय है ।
17% INTEL के वैज्ञानिक भारतीय है ।
13% XEROX के कर्मचारी भारतीय है ।

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और भी कुछ तथ्य…. ये तथ्य एक जर्मन पत्रिका मे छापे है ।

१)भारत ने पिछले १००० वर्षो से किसी भी देश पर शासन नहीं किया ।
२) भारत ने ही नम्बर पध्दत्ति कि की खोज की एवं शुन्य की खोज आर्यभट्ट ने की ।
३)विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय भारत में था जो ७०० ईसा पुर्व जहाँ १०५०० विद्यार्थी ६० से अधिक विषय पढ़ते थे । तथा नालंदा विश्वविद्यालय ४००ईसा पुर्व स्थापित हुआ था ।
४)Forbes पत्रिका के अनुसार संस्कृत भाषा कम्पुटर के लिये सर्वोत्तम है ।
५)आयुर्वेद प्रथम स्त्रोत के उपचार पध्दति का ।
६)भारत एक समय में सबसे अमीर साम्राज्य था।
७) Navigation की कला का जन्म भारत में सिधं नदी पर ५०००साल पुर्व हुआ था ।
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८) पाई की गणना बुधायना ने की एवं Pythagorean प्रमेय दी ।
९) एलजेबरा त्रिकोणमिती एवं केल्कूलस भारत की देन है । Quadratic समीकरण Shridharacharya ने ११ वी शताब्दी दी ।
१०) भूगोलिक संस्थान अमेरीका के अनुसार 1896 तक सिर्फ भारत में हीरा पाया जाता था ।
११) शतरंज भारत की खोज है ।
१२) सर्जरी के पिता सुश्रुता है । २६०० साल पहले वो Cerareans , cataract , fractures और Urinary Stones की सर्जरी करते थे ।
१३) हरप्पा सस्कृति भारत में ५०००साल पहले स्थापित हुई थी।
१४) दशमलव पद्धति एवं स्थानीय मान पद्धति १०० ईसा पुर्व भारत में विकसित हुई ।

और भी ऐसी ना जाने कितनी बाते है । यह सूची बहुत बड़ी है ।
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मुझे यह सब जानकर बहुत गर्व हुआ ।

Vandemataram

ऐसा है हमारा भारत…
Vandemataram
गर्व से कहे हम भारतीय है ।

Vandemataram

वन्देमातरम

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14 Responses to “गर्व से कहे के हम भारतीय है।”

  1. जी.के. अवधिया Says:

    आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है। विश्व को क्या कुछ नहीं दिया भारत ने किंतु दुःख होता है आज हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को भूल कर पश्चिम के पीछे भाग रहे हैं।

    अपनी सूची में यह भी जोड़ लीजिये “गणतंत्र का आरंभ भी भारत से हुआ और विश्व का प्रथम गणतंत्र भारत के वैशाली राज्य में था” आचार्य चतुरसेन के उपन्यास “वैशाली की नगरवधू” से और भी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  2. Prem Piyush Says:

    वन्दे मातरम

  3. सागर चन्द नाहर Says:

    दिल बहलाने के लिये खयाल अच्छा है गालिब

    आपको स्वन्त्रतता दिवस की अग्रिम शुभकामनायें।

  4. मुन्ना भारतीय Says:

    मेरा गर्व कटु सत्य के समक्ष सर नहीं उठा पा रहा है. वैसे आपके द्वारा दिये गये निम्न आँकड़े 100% प्रतिशत गलत हैं:

    38% डाक्टर अमेरीका में , भारतीय है ।
    12% वैज्ञानिक अमेरीका में , भारतीय है ।
    36% नासा के वैज्ञानिक भारतीय है ।
    34% माइक्रोसाफ्ट के कर्मचारी भारतीय है ।
    28% IBM के कर्मचारी भारतीय है ।
    17% INTEL के वैज्ञानिक भारतीय है ।
    13% XEROX के कर्मचारी भारतीय है ।

    और, अगर दिल को खुश रखने के लिये ये मान भी लिया जाये कि ये सही हैं, तो इससे भारत को क्या मिल रहा है.

  5. रजनीश मंगला Says:

    हमारी सारी शिक्षा अंग्रेज़ी में होती है जिसका फ़ायदा अमरीका जैसे देश भारत से अधिक उठा लेते हैं। धिक्कार है हम पर। हम ऐसी ही खुशफ़हमियों में जीने लायक हैं।

  6. hemjyotsana parashar Says:

    आप सभी की इन मिली जूली प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद ।
    मैं ये बात मान सकती हूँ कि इस लेख में १-२ बातें पूर्णरूपेण सत्य ना हो । पर ये लेख या इस में लिखी बातें सिर्फ दिल बेहलाने का ख्याल मात्र नही है । ये तो आप सभी मानेगे कि भारत अनरीका जाने लिये H1 वीजा लगभग 1 लाख भारतीयों को देता है इसका मतलब हर साल लगभग १ लाख भारतीय अमेरीका जाते है और ये संख्या हर साल बढ़ रही है ।

    मै अपने देश की कमीयों को भी जानती हुँ परन्तू ये सच्च है कि भारत के लोगो के हुनर की तारीफ सभी करते है । भारत ने अपना लौहा हर क्षेत्र में मनवा रहा है ।
    रहा सवाल के इस से भारत को क्या लाभ ?
    तो क्या आप जानते है प्रधानमंत्री सहायता कोश में सबसे ज्यादा धन कहाँ से आता है ?
    क्या आपने सोचा के $ को भारत भेज कर ये NRI देश की आर्थिक विकास करने में कितनी मदद करते है ?
    ये सच है कि भारत में पढ़ लिख कर अमरीका की सेवा करना गलत है ।
    पर आज जो सभी बड़ी कम्पनियाँ भारत क्यूँ आना चाहती है ?
    इन अप्रवासी भारतीयों की वजह से भारत में रोजगार के अवसर बढ़े है ।
    हर साल २-३ लाख या शायद उससे भी अधिक रोजगार तो सिर्फ IT क्षेत्र में है ।
    हर बात के दो पहलू होते है अच्छा भी एवं बुरा भी ।
    ये एक बहुत बड़ा विषय है ।

    जिस प्रकार के तथ्य यहाँ आपने पढ़े उसी प्रकार के कई और भी तथ्य है जो आप इस लिंक में मिलेगे ।

    http://www.nrilinks.com/usa/indians/facts.htm

  7. उन्मुक्त Says:

    मालुम नहीं भारतीय बाहर जा कर अच्छे बन जाते हैं यहां रहते हैं तो बस …

  8. prakruti Says:

    जो भी तथ्‍य प्रवासी भारतीयों के बारे में दिये गये हैं , वे प्रथम दृष्टि में सही प्रतीत होते हैं , इसमें शक की कोई जगह नहीं होंनीं चाहिये । सवाल यह उठाना कि देश को प्रवासी भारतीयों से क्‍या मिला ? एक बेवकूफी से भरा हुआ प्रश्‍न है । सवाल यह होना चाहिये कि इन प्रवासी भारतीयों को देश क्‍यों छोड़ना पडा ? ये जब बाहर जाते हैं तो अपने कामों से क्‍यों आगे बढ़ जाते हैं ? ये अपने देश में क्‍यों नहीं पूछे जाते ? एक उदाहरण देता हूं । पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी के घुटनें का आपरेशन करनें वाले डाक्‍टर [Dr. Nanawat] नें विदेश में जाकर जिस तकनीक का आविष्‍कार किया , उसे सारी दुनियां ने सराहा । इस चिकित्‍सक नें घुटनें के मरीजों के लिये इलाज करनें का एक नया कान्‍सेप्‍ट दिया । इसी डाक्‍टर को भारत के किसी भी मेडिकल कालेज में नौकरी तक नहीं मिली और न किसी सरकार नें इस डाक्‍टर की सेवाओं को लेनें के लिये प्रोत्‍साहन दिया ।

    समस्‍या की जड़ यह है कि भारत में रहनें वाले “स्‍लोगन माइन्‍डेड” हैं । गूजरों का हिन्‍सात्‍मक प्रदर्शन इसका एक अच्‍छा उदाहरण हो सकता है ।

  9. hemjyotsana parashar Says:

    Behad sahi swaal uthaye hai aapne……….
    bas inhi swaalon ka intjaar tha muje koi to inhe uthaye..
    aalochanaa kerna bhut aasaan hai.
    jane wale per swaal utha aur bhi aasaan hai. per jo Prakruti jee aapne jo kahaa wo sahi hai jab ham inswaalon ke jwaab dhundh ne nikalenge to yaakinn raastaa milega.
    Dhanewad

  10. GK Awadhiya Says:

    प्रकृति जी ने बहुत ही सही सवाल उठाये हैं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, नोबल पुरस्कार प्राप्त डॉ. खुराना जी भी विदेश में अपना अध्ययन समाप्त कर अपने देश की सेवा करने के लिये, वहाँ के अच्छे पद के प्रस्ताव को ठुकरा कर, वापस स्वदेश आये थे किन्तु एक लंबे अरसे तक नौकरी के लिये भटकने के बाद निराश होकर पुनः विदेश के पद को स्वीकारा। भारत का सौभाग्य रहा कि वहाँ की नागरिकता मिलने के कुछ ही दिनों पूर्व उन्हें नोबल पुरस्कार मिल गया और भारत का नाम हो गया।

    हमारी श्रेष्ठतम प्रतिभाएँ देश छोड़ कर विदेश चली जाती हैं तो इसके लिये हम ही लोग दोषी हैं न कि वे।

  11. divyabh Says:

    मैं गुगल पर नालंदा का कुछ देख रहा था तो यह ब्लाग दिखा… अच्छी जानकारी।

  12. Krishna Shukla Says:

    aapne Bahut Hi accha Likha hai

  13. A.R & ASSOCIATES Says:

    hume garw hai ki hum us bharat desh ki santan hai jo duniya ka sabase bada lokatantra hokar sarv dharm sambhav ke saatha pragati ke pad par lagatar agrasar hai tatha is desh ko or mahan, prabhavshali tatha shaktishali banane hetu chota he sahi kintu dil se kiya gaya kary he matrabhumi ki sachi sewa hai.

    VANDE MATARAM, JAY BHARAT

  14. mehek Says:

    jai hind jai bharat,gantantra din ki aapko bhi badhai ho hem.

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