लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

स्वतन्त्रता संग्राम से थका देश…

Posted by hemjyotsana "Deep" on August 9, 2007

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देश हमारा , दिवस महान मना रहा है ,
प्रण करे हम ,इसे विकसित करने में कोई कमी ना छोड़ेगें ।
स्वतन्त्रता संग्राम से थका देश आराम बहुत अब कर चुका ,
अब और नहीं इसे सो ने देगें ।
लोकतन्त्र के इस महान देश की दुर्गति अब ना होते देगें ।
राम जन्मे ,कृष्ण जन्मे बुध्द नानक गुरू जन्मे ,
रावण को जन्म ना लेने देगें ।
कंस हुआ यदि कोई देश में ,
प्रण करले के प्राण उसके पल-भर में हम हर लेगें ।
अच्छाई हम चुन के जहाँ की , खुशियाँ सब जगह बिखेर देगें ।
चन्द्रगुप्त , चाणक्य , अशोक की इस धरती पर ,शकूनी को ना होने देगें ।
लक्ष्मीबाई शिवाजी राणा के देश में ,लहू निर्दोश का ना बहने देगें ।
प्रण करले इस देश कर्म भूमि बना कर रण भूमि ना बनने देगें ।
देगे सम्मान सभी को , पर अपमान देश का ना होने देगें ।
गंगा यमुना की पावन धरती को ,
ऋषि मुनियों के अमर ज्ञान को ,
ईश्वर अल्लाह के पवित्र धाम को , नापाक नहीं होने देगें ।

आओ जोड़े नये शब्द , आओ छोड़े नये पैगाम ,
जय जवान , जय किसान , जय विज्ञान में ,
आज जोड़े , जय इंसान , जय हिन्दुस्तान ।

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5 Responses to “स्वतन्त्रता संग्राम से थका देश…”

  1. संजय तिवारी Says:

    अच्छा संदेश

  2. शैलेश भारतवासी Says:

    मुझे याद है १०वीं तक के बच्चे स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर इसी तरह की कविता सुनाते थे। उसमें थोड़ा भी अंतर नहीं किया है। जिस प्रकार उन बच्चों के भाषण किसी भी श्रोता पर कोई असर नहीं करते थे , उसी प्रकार आपकी यह रचना प्रभाव नहीं छोड़ती।

  3. hemjyotsana parashar Says:

    जी शैलेश जी,
    सही पहचाना आपने , ये कविता स्कूल के दिनों की ही है। मैनें ११ कक्षा में २६ जनवरी के लिये लिखी थी ।
    ये मेरी प्रथम कविता है जिसे मेरे अलावा औरों ने सूना था ।
    ये यहाँ प्रकाशित किसी बढ़े के लिये नहीं उन्ही स्कूल के बच्चों के लिये है । जो आज भी १५ Aug. और २६ Jan. देश भक्ति कवितायें ढ़ुढते है।

  4. Brij Says:

    जीवन की इस आप-धापी मैं यदि हम यह प्रण कर लें तो शायद सब का उद्धार हो जाएगा,
    सब लोग आगे बढेंगे ओर देश भी।
    धन्यबाद आपके लिए

  5. indianglory Says:

    nice site, i like it.. keep it up
    http://www.indianglory.wordpress.com

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