क्या देश को बांट रहे Reality Live shows ?
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on अगस्त 6, 2007
क्या देश को बांट रहे Reality Live shows ? Indian Idol ,Voice of India , सा रे ग म प और भी ना जाने किनते शो है जो हमारी देश में छिपी प्रतीभा को सामने ला रहे । यकीनं ये बहुत अच्छा है हम सब के लिये । अवसर बढ़ रहे । अपने अपने क्षेत्र के ज्ञानी लोग उनका आकंलन करते है प्रतिक्रिया देते । अच्छी बात ये है कि जनता के लिये चुने जाने वाली प्रतीभा का फैसला भी जनता पर ही है ।
पर कुछ ऐसा है जो मेरे अन्तर आत्मा को ठीक नही लग रहा । मुझे ये सभी प्रोग्राम बहुत अच्छे लगते है । संगीत मेरी जिन्दगी है । अरे घबराये नही मैं किसी शो में नहीं आ रही हूँ और ना ही ऐसे किसी प्रयास में असफल रही हूँ जो अपनी खींज उतारने के लिये उनकी बुराई करने की कोशिश में हूँ ।
मैंने बचपन से अब तक यही सुना था कि सगींत को कोई सरहदो नहीं रोकती । सगींत बाटंता नहीं जोड़ता है परन्तू ये कार्यक्रम तो जैसे देश को बांट ने पर आमदा है। बंगाली प्रतीयोगी बंगाली में बंगाल से वोट मागंता है तो हिमाचल का प्रतीयोगी हिमाचल के लोगो से कहता है । UP का प्रतीयोगी कहता है के मैं UP से अकेला प्रतीयोगी हुँ मुझे जीताओ । कोई बंगाली है कोई राजस्थानी है कोई गुजराती है पर सवाल ये है कि फिर भारतीये कौन है ? TV वाले बस अपनी रोटी सेक रहे है क्या किसी को इस में कुछ गलत नजर नही आता ? या सिर्फ ये मेरे ही दिमाग का उपज है ?
सोचियेगा जरूर……….
मुझे कोई रास्ता नही मिला इस बात को उठाने का तो आप लोगो तक अपनी बात रखी । अपने विचार जरुर दीजियेगा । और अगर कोई किसी News Channel को ये बात पहुँचा सके तो मैं आभारी रहूँगी ।
पहला लेख है कोई गलती हो तो क्षमा कीजियेगा ।














गरिमा said
आपकी बात से पुर्णतया सहमत हूँ, यह तरीका बिल्कुल गलत है, अभी कल ही मै और मेरी बहन इस मुद्दे पर बात कर ही रहे थे, आज आपकी पोस्ट दिख गयी… संगीत सरहदो मे सिमट रही है या सरहदो को बढावा दे रही है.. जो भी है जो हो रहा है बहुत गलत हो रहा है।
vimal verma said
ये खेल ज़्यादा से ज़्यादा एस एम एस प्राप्त करने का है..देखतीं नहीं है बात- बात पर न्यूज़ चैनल एस एम एस करवाता रहता है, इसमें कुछ हिस्सा चैनलों को प्राप्त होता है इससे इन कार्यक्रमों की लागत निकल जाती है. शुद्द रुप से इन कार्यक्रमों के केन्द्र में मुनाफ़ा होता है, और हमारे आपके रोकने से ये रुकने वाला नहीं है ये मान कर चलता हूं,आपने देखा नहीं दुनिया के अजूबों पर भी तो एस एम एस करवाके ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया गया और मीडिया भी इन सब मे बढ़ चढ़ कर भाग ले रहा था.बस आखिर में पैसे के लिये ये कुछ भी कर सकते हैं
Prem Piyush said
राजनीति, खान-पान और संस्कृति पर क्षेत्रवाद का असर तो मान्य हो जाता है । पर जब प्रतियोगिताएँ राष्ट्र स्तर ( और अंतराष्ट्रीय दर्शक ) की होती है तो क्षेत्रवाद के तर्ज पर बढ़ावा देने से सही प्रतिभा का सही मुल्यांकन नहीं हो पाता है । सही कहा जाए तो कला सीमाहीन होती है ।
वैसे पहला लेख अच्छा है । दिमाग में ऐसी ही खुजली होती रही तो जिंदगी के लम्हें लेखों में भी आएँगे । शैली अच्छी है – लेकिन समयान्तर में और परिष्कृत होने की अपेक्षा है ।
अनुगूँज पर एक और लेख की अपेक्षा है । इससे कल्पनाशीलता को नया आयाम मिलेगा ।
divyabh said
ये शो से पहले का मर्म है…
भारत हमेशा से भाषावाद-संप्रदायवाद-क्षेत्रवाद आदि में बंटा रहा है
जो अपने-आप में बहुत बड़ी समस्या है तो चंद लोग इसका फायदा
उठाएँगे ही… जब अपना ही गिरेबान गंदा हो तो औरों का क्या…
paramjitbali said
आप ने बिल्कुल सही प्रश्न उठाया है। इस बारे मॆं सोचना ही चाहिए । लेकिन यह तभी हो सकेगा जब भाग लेने वाले कलाकार व इन कार्यक्रमों को पेश करनें वाले,वोट माँगते समय इस का ध्यान रखे ।
Vishal Mungi said
में दिव्याभ से सहमत हूँ | अगर सिर्फ कला कि बात होती तो बात और थी लेकिन आप जब वोटिंग बीच में लाते हैं तो वही होता है जो हमारी पॉलिटिक्स के साथ हुआ है |
sukhdev said
aap ki likhi bate bahut acha hai
Jaagesh Patel said
आप की बात पूर्णता सही हे. ये बड़े बड़े संगीत के reality show देखके लगता हे ये लोग (TV वाले ) संगीत को ही नही देश को भी बाट ने पे आमादा हे. पहले ही अपना देश जातिवाद, संप्रतावाद, धर्मवाद से झुंझ रहा है, इनमे ये लोग अपनी तरफ से और बढोतरी कर रहे हे. जो संगीत किसी भी धर्म-प्रान्त से परे होता था आज कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए SMS की राजनीती खेल के तथाकथित उत्कृष्ट प्रतियोगी चुनने के नाम पर हम बटे हुए लोगो कों और बाटते हे. कोई प्रान्त के नाम पर वोट देता हे तो कोए धर्म के नाम पर. ये ग़लत हो रहा हे…
ras said
Your all poem are very fine. I want a poem in the nature of India.
PAWAN KUMAR GUPTA said
very important in my life