लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

वो एक लड़की……..

Posted by hemjyotsana "Deep" on August 5, 2007

वो एक लड़की……..
वो जो बातों-बातों में मूझको बदल जाती है ,
वो जो मेरे गम को पल में दूर कर जाती है ,
वो जो कभी फोन पर तो कभी मिलने आती है ,
वो जो बातों में , कविता में रगं भर जाती है ।

वो जो ख्यालों में भी मेरे , सवालों में भी मेरे ,
वो जो सबसे पास है मेरे , हमेशा साथ है मेरे ,
वो जिसे समझी भी और ना समझ पाती हूँ ,
वो जो रह रह कर मुझ को याद आती है ।

वो जो समझाती मुझे ,कभी ना समझ बन जाती है ,
वो जिससे मैं लड़खड़ाते कदमो मे भी सम्भल जाती हूँ ,
वो जिसे मैंने बताया बहुत और कुछ बताया नहीं ,
वो जिससे मैंने सीखा बहुत और कुछ सीखा नहीं ,

वो जिससे कुछ भी कहने में ड़रती नहीं मैं ,
वो जिससे बिछड़ ने से बहुत ड़रती हूँ मैं ,
वो खुद इस को पढ़लें तो समझे नहीं ,
वो मेरी सबसे अच्छी रुचि है , हाँ वही जो सुरुचि है।

Thanks my friend Suruchi –> for being my friend.

11 Responses to “वो एक लड़की……..”

  1. प्रेम का एहसास दिलाती आप लिखी यह रचना अच्छी है।बहुत खूब लिखा है-

    वो जो ख्यालों में भी मेरे , सवालों में भी मेरे ,
    वो जो सबसे पास है मेरे , हमेशा साथ है मेरे ,
    वो जिसे समझी भी और ना समझ पाती हूँ ,
    वो जो रह रह कर मुझ को याद आती है ।

  2. divyabh said

    सुंदर कविता एक दोस्त के लिए…
    बेहतरीन!!!

  3. दोस्तों पर सुंदर कविताएँ कई ब्लाग पर दिखी । धन्य है तुम्हारी दोस्त ।

    सोचकर सच पुछो तो जलन होता है – मेरा क्या ऐसा कोई मित्र नहीं । एक है तो उसे कविताएँ लिखनी नहीं आती ।

  4. sandeep Aatm said

    I think iske words dil ko cheer k nikalte h
    best of luck

  5. suruchi said

    thanks ,kya kahu aage kuch kahne ke liye shabd nahi hai,ye mera ab tak ka sabse pyara gift hai

  6. Manish said

    नभ में बिखरे श्यामल बादल

    तुम्हें पुकारे पिघला काजल

    बंद खिड़की कर बंद दरवाज़ा

    चुपके से तू भीतर आजा

    आँखों को हौले से मींच

    बाहों के घेरे में भींच

    कोमल गालों को सहला दे

    चिर सोए एहसास जगा दे

    बढ़ जाए इस दिल की धड़कन

    हो फिर से होंठों में कंपन

    मधुर मिलन की मीठी बातें

    पल में गुज़रें लम्बी रातें

    गिरना उठना भूलें पलकें

    रोम रोम से मद अणु छलके

    तन थक कर हो जाए बोझिल

    मन सुन्दर सपनों में गाफ़िल

    प्रीत रीत का सूरज चमके

    तन मन रूह सोने सी दमके

    गम की सन्धया जाए बीत

    लौट आए जो बिछुड़ा मीत।।

    aur kuch panktiyan Dr.Kumar ki-

    जब भी मुँह ढक लेता हूँ

    तेरी ज़ुल्फों की छाँव में

    कितने गीत उतर आते है

    मेरे मन के गाँव में।

  7. Manish said

    Namaskar Hemjyotsna ji aap hamare hi Rajasthan mein chhupa hua ek ratna hain ye pehle maloom nahin tha(main Jaipur ka hoon)– aapki kavitayen padhi,bahut achchi lagi,apne ek favourite kavi ki panktiyan apko bhej raha hoon padhiyega aur apna mail id mujhe bhejen

  8. Amit Kulshrestha said

    Yaar tum bahut aacha likhti ho…

  9. Shilpi said

    yeh jyotsna its really wonderful yaar, first time i visited to this …its really wonderful ….ek ek poem padatae hi wah wah bolnae ko dil karta hai…..
    gud gr8 going…..one poem for me plz… and plz not nadira….ok…

  10. Yash said

    zindgi ki dhup itni tej thi ki aankh bhi utha na sake, ek geet likha tha humne bhi zo ga na sake

  11. bhut sundar. likhati rhe.

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