लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

मैं कौन हूँ…….

Posted by hemjyotsana "Deep" on July 30, 2007

मैं कौन हूँ , मैं कौन हूँ , मैं कौन हूँ ।
जर्रा हूँ , समन्दर हूँ , या तुफान हूँ ,
मैं कौन हूँ , मैं नहीं जानता ,
मैं खुद से अभी  तक अनजान हूँ ।
पानी हूँ , कश्ती हूँ , या साहिल हूँ ,
जीवन से बन्धा एक रिश्ता या ,
रिश्तो में बन्धी एक जान हूँ ।
आँखों में छुपा एक आँसूं हूँ या ,
दिल में बसा एक अरमान हूँ ।
मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,
मैं कौन हूँ , मैं नहीं जानता ,
मैं खुद से अभी  तक अनजान हूँ ।
कौन हूँ मैं , गैर हूँ या अपना हूँ ,
बोझ हूँ किसी पर , या दुआ हूँ  या ,
खुदा का किया कोई एहसान हूँ ।
मैं कौन हूँ………
खुशी हूँ , दर्द हूँ , या कोई एहसास हूँ ,
तन्हा हूँ या मैं किसी के पास हूँ ,
साज़ हूँ , राग हूँ , या दर्द भरी आवाज़ हूँ ,
मैं कौन हूँ , मैं नहीं जानता ,
मैं खुद से अभी  तक अनजान हूँ ।
गीत हूँ , गज़ल हूँ , या शायर का कोई अन्दाज़ हूँ ,
मैं कौन हूँ , मैं कौन हूँ , मैं कौन हूँ ,
अन्त हूँ , मध्य हूँ , या कोई आगाज़ हूँ
मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,
सोचते सोचते एक उम्र गुज़र जायेगी ,
है यकीं मुझको मेरी पहचान मिल जायेगी ।

13 Responses to “मैं कौन हूँ…….”

  1. Anamika Says:

    hey hem…..good poem…keep it up

  2. anuradha Says:

    अन्तहीन तलाश ,बेचैनी । ढेर सारे सवाल और उलझता वजूद ।
    बहुत खूब लिखा है।

  3. paramjitbali Says:

    आप को जरूर अपनी पहचान मिलेगी।आप की रचना आप के भीतर जन्मते अध्यात्मिकता को दर्शा रही है।बधाई।

  4. विज Says:

    बहुत खूब…

  5. divyabh Says:

    सच्चा लिखा है…खरा लिखा है…और अनंत की ओर इशारा भी।

  6. Pragya Says:

    Its wonderful Hem……………
    waiting for Next…………

  7. समीर लाल Says:

    बहुत बढ़िया जीवन दर्शन. वाह!!

  8. Shastri JC Philip Says:

    “मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,मैं कौन हूँ ,
    सोचते सोचते एक उम्र गुज़र जायेगी ,
    है यकीं मुझको मेरी पहचान मिल जायेगी ।”

    एक अच्छी रचना का उससे भी अच्छा निष्कृष — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

  9. Shastri JC Philip Says:

    ऊपर दी गई टिप्पणी में “निष्कृष” को निष्कर्ष पढें !!

  10. virendrasingh Says:

    wow, Ultimate Destination…….,it indicates right journey in the right Direction.
    Hemji, aapki rachana khud manzil talashte auoro ko raah dikhayegi.
    :::::::::::::::::::::::———- [ VANDE MATRAM ] ———-::::::::::::::::::::::::

  11. Mukund Says:

    Very Wonderful. Highly motivated from this poem. Please carry on.

  12. mehhekk Says:

    khud ki talash hmmmmmmmmmmmmm nice

  13. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    आप का ब्लॉग आज ही पढ़ा। अच्छा लगा। आप भी कोटा से ही हैं। यह जान कर बहुत प्रसन्नता हुई। पूरा पढ़ कर टिपियाता हूँ।

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