Teachers Day ki duniya mein GURU-PURNIMA

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Teacher’s Day की इस दुनिया में आज गुरु पुर्णिमा जैसे विशेष दिन मैं अपनी वो कविता आप सब के सामने रख रही हूँ जो मैंने अपने विद्यालय के दिनो में लिखी थी ।

वो कौन सा है पद ,
जिसे देता ये जहाँ सम्मान ।
वो कौन सा है पद ,
जो करता है देशों का निर्माण ।
वो कौन सा है पद ,
जो बनाता है इंसान को इंसान ।
वो कौन सा है पद ,
जिसे करते है सभी प्रणाम ।
वो कौन सा है पद ,
जिकसी छाया में मिलता ज्ञान ।
वो कौन सा है पद ,
जो कराये सही दिशा की पहचान ।
गुरू है इस पद का नाम ।
मेरा सभी गुरूजनो को शत-शत प्रणाम ।

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203 responses »

  1. कोई पत्थर को ही पूजता, तो दूसरा तराशकर पत्थर, मुर्ति बनाता ।
    खुदा के प्यारे है यहाँ दोनों बंदे, पर दूसरा यहाँ मुर्तिकार कहलाता

  2. Hi,
    Aapke maine bahut sare poem padi bahut achhi lagi. Yeh poem likhne ke prerna aapko kaha se milte hai. Abhi to maine aapke sirf 10 poem he padi hai jinhe pad kar mai bahut zyada prabhavit hua hu. Please mujhe aap batayange ke aap ke sabse favourite poem kaun se hai jo aapko sab se zyada pasand hai. Agar aap bura na mane to please weh poem mujhe mail kar de

  3. The poem is very nice. It expresses the role of a teacher in the making of a nation as well as in the making of a better world. The poem is short but pays a tribute to the teachers…………..

    I must thank u for composing such a fine poem on teachers …………………………………..

  4. वो कौन सा है पद
    जिसे देता है येजहाँ सममान
    वो कौन सा है पद
    जो करता है देशोँ का निरमान
    वो कौन सा है पद
    जो बनाता है इंसान को इंसान
    वो कौन सा है पद
    जिसे करते है सभी प्रणाम
    वो कौन सा है पद
    जिसकी छाया मे मिलता है ज्ञान
    वो कौन सा है पद
    जो कराये सही दिशा की पहचान
    गुरु है, इस पद का नाम
    मेरा DURGESH का है इन गुरुजनोँ का शत-शत प्रणाम

  5. NICE POEM.I RESPECT YOUR EACH AND EVERY LINES WHICH INCREASE THE VALUE OF TEACHERS.WISH U ALL……..
    teacher is a god
    Guru Brahma Gurur Vishnu
    Guru Devo Maheshwaraha
    Guru Saakshat Para Brahma
    Tasmai Sree Gurave Namaha………………………….

  6. पावन सत्संग की धारा हैSSS ..पावन सत्संग की धारा है
    इस धारा में जो डूब गया ..उस को मिल गया किनारा है
    पावन सत्संग की धारा है
    जब डूबे इसमें पञ्च तत्व मानव की रचना होती है
    जब डूबे इसमें सातों रंग आलोक सर्जना होती है
    जब डूबे इस में शब्द शब्द गीतों के निर्झर बहते हैं
    जब डूबे इस में सातों स्वर संगीत सुरीले सजते हैं
    ये धार सत्य शिव सुंदर है पर बहती उर के अंदर है
    एक बार झूम कर देखो तो सच्चाई छु कर देखो तो
    पावन सत्संग की धारा हैSSS

    इस धार में डूब कबीरा ने ज्यों की तों चादर रख दीनी
    इस धार में डूब बिहारी ने गागर में सागर भर दीनी
    मीरा इस में ऐसी डूबी विष में ही श्याम नज़र आये
    शबरी इस में ऐसी डूबी श्री राम स्वयं चल कर आये
    ये छिलकों में विदुरानी के आंसुवो में राधा रानी के
    ये धार सत्य शिव सुंदर है पर बहती उर के अंदर है
    पावन सत्संग की धारा हैSSS

    ये प्रेम धार माँ के उर से निकले तो अमृत होती है
    ये प्रेम धार गुरु के मुख से निकले तो सद्गति होती है
    ये प्रेम धार प्रभु के उर से निकले तो अद्भुद होती है
    माँ गुरु इश्वर की कृपा मिले जीवन की शुभगति होती है
    सारे बंधन कट जाते हैं त्रय ताप सकल मिट जाते हैं
    अंतर्घट में अमृत छलके क्यों फिरता मारा मारा है
    पावन सत्संग की धारा हैSSS

  7. पागल दिल था
    अन्धेरी रात उसने भी
    क्या करूँ
    शहरों का बच्चा है
    कागज़ पर मंदिर
    होली की शुभकामनायें
    गुनाह होते हुऎ देखा
    कुछ गीत तुम्हारे देदो
    2 साल -एक सफ़र
    दीप , दीप क्यूँ हैं ?

  8. muje aap ki likhi hui kavita “Teachers Day ki duniya mein GURU-PURNIMA” bahut achi lagi n 5 sept. 2012 ko aap ki is kavita ko main Jodhpur main Ek School main meri Bateeji jo 3rd class main h ko Teacher’s day per sunaane k liye tayar kar rahaa hu.

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