रोज सुबह मिलते है इनसे , क्या हमको करना है ,
ये बतलाते है ।
ले के तस्वीरें इन्सानों की ,सही गलत का भेद हमें ,
ये बतलाते है ।
कभी ड़ांट तो कभी प्यार से , कितना कुछ हमको ,
ये समझाते है ।
है भविष्य देश का जिन में , उनका सबका भविष्य ,
ये बनाते है ।
है रगं कई इस जीवन में ,रगों की दुनिया से पहचान ,
ये करवाते है ।
खो ना जाये भीड़ में कहीं हम , हम को हम से ही ,
ये मिलवाते है ।
हार हार के फिर लड़ना ही जीत है सच्ची , ऐसा एहसास ,
ये करवाते है ।
कोशिश करते रहना हर पल , जीवन का अर्थ हमें ,
ये बतलाते है ।
देते है नेक मज़िल भी हमें , राह भी बेहत्तर हमे ,
ये दिखलाते है ।
देते है ज्ञान जीवन का , काम यही सब है इनका ,
ये शिक्षक कहलाते है ।
Archive for July 29th, 2007
ये शिक्षक कहलाते है……
Posted by hemjyotsana "Deep" on July 29, 2007
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Teachers Day ki duniya mein GURU-PURNIMA
Posted by hemjyotsana "Deep" on July 29, 2007
Teacher’s Day की इस दुनिया में आज गुरु पुर्णिमा जैसे विशेष दिन मैं अपनी वो कविता आप सब के सामने रख रही हूँ जो मैंने अपने विद्यालय के दिनो में लिखी थी ।
वो कौन सा है पद ,
जिसे देता ये जहाँ सम्मान ।
वो कौन सा है पद ,
जो करता है देशों का निर्माण ।
वो कौन सा है पद ,
जो बनाता है इंसान को इंसान ।
वो कौन सा है पद ,
जिसे करते है सभी प्रणाम ।
वो कौन सा है पद ,
जिकसी छाया में मिलता ज्ञान ।
वो कौन सा है पद ,
जो कराये सही दिशा की पहचान ।
गुरू है इस पद का नाम ।
मेरा सभी गुरूजनो को शत-शत प्रणाम ।
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