लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

हे जीव जगत के मनुज सुन……..

Posted by hemjyotsana "Deep" on July 27, 2007

हे जीव जगत के मनुज सुन ,
तू बलशाली है थक हार नही ।

जीत तेरी हर सुबह होगी ,
मानेगा जब तक तू हार नहीं ।

माना है रस्ता पथरीला  ,
तू पल पल इसे निहार नहीं ।

तू सफल नहीं है आज मगर,
खुद को असफल स्वीकार नहीं ।

है अदम्य साहस का मालिक ,
ड़रना तेरा  व्यवहार नहीं ।

तू रखता है शस्त्र हौसला ,
घबराना तेरा  प्रहार नहीं ।

ज़श्न विजय पर गाने वाले ,
ईद दिवाली ही तेरा त्यौहार नहीं ।

पाना खोना खेल है जीवन ,
दर्द ही इसका सार नहीं ।

7 Responses to “हे जीव जगत के मनुज सुन……..”

  1. Prem Piyush Says:

    अच्छी लगी आशावादी पंक्तियाँ । सरल शब्दों में प्यारी सी है ।

    यूँ लगता है -

    अब सुबह देर नहीं,
    राही अब अँधेर नहीं ।

  2. समीर लाल Says:

    बढ़िया संदेश. बधाई.

  3. paramjitbali Says:

    बढिया रचना है।

  4. sandeep Aatm Says:

    बढ़िया संदेश
    बढिया रचना
    nice meassage

  5. aksahr Says:

    llllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllll

  6. Mukund Says:

    I’ve no words, I don’t know how to appreciate your poem. Thanks.

  7. Shashikant Says:

    Bahut Encouraging Kavita hai Hem Jyotsna , Keep it up.

    -Shashikant

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