लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for July 27th, 2007

हे जीव जगत के मनुज सुन……..

Posted by hemjyotsana "Deep" on July 27, 2007

हे जीव जगत के मनुज सुन ,
तू बलशाली है थक हार नही ।

जीत तेरी हर सुबह होगी ,
मानेगा जब तक तू हार नहीं ।

माना है रस्ता पथरीला  ,
तू पल पल इसे निहार नहीं ।

तू सफल नहीं है आज मगर,
खुद को असफल स्वीकार नहीं ।

है अदम्य साहस का मालिक ,
ड़रना तेरा  व्यवहार नहीं ।

तू रखता है शस्त्र हौसला ,
घबराना तेरा  प्रहार नहीं ।

ज़श्न विजय पर गाने वाले ,
ईद दिवाली ही तेरा त्यौहार नहीं ।

पाना खोना खेल है जीवन ,
दर्द ही इसका सार नहीं ।

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