लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for July 22nd, 2007

झोंपड़े कहते है…………

Posted by hemjyotsana "Deep" on July 22, 2007

इन वीरानो को अब शहर कहते है ।
यहाँ चार दीवारों को ही घर कहते है ।

धुआँ उगलती मशीनो की सड़कें है यहाँ ,
बचपन खेलें उसे गावं की गली कहते है।

बेज़ान सी जिन्दगी जीते है शहरों में ,
गावं में हर पल को जीवन कहते है ।

रगों से भरा है ये जीवन कितना  ,
ये बेरगं गावं के झोंपड़े कहते है ।

ऊचीं इमारतों ने जूदा ज़मीं आसमां किये ,
मिलता है आसमां धरती से,उसे गावं कहते है ।

रोशनी जले शहरो में बेइन्तहा लेकिन ,
गावं में सुकून से जले उन्हे दीप कहते है ।

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