इन वीरानो को अब शहर कहते है ।
यहाँ चार दीवारों को ही घर कहते है ।
धुआँ उगलती मशीनो की सड़कें है यहाँ ,
बचपन खेलें उसे गावं की गली कहते है।
बेज़ान सी जिन्दगी जीते है शहरों में ,
गावं में हर पल को जीवन कहते है ।
रगों से भरा है ये जीवन कितना ,
ये बेरगं गावं के झोंपड़े कहते है ।
ऊचीं इमारतों ने जूदा ज़मीं आसमां किये ,
मिलता है आसमां धरती से,उसे गावं कहते है ।
रोशनी जले शहरो में बेइन्तहा लेकिन ,
गावं में सुकून से जले उन्हे दीप कहते है ।













