यादों के नगमें सुनाई देते है
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जुलाई 8, 2007
सायो के चेहरे कब आईने में दिखाई देते है ।
तन्हाई में , बस यादों के नगमें सुनाई देते है ।
नये रगों की रोशनी में दबते है कहाँ ,
फूल ख़्यालो के हर पल दिखाई देते है ।
उन पे हँसते है हम अक्सर तन्हाई में ,
जो समझते हमें वो ,जो हम उनको दिखाई देते है ।
वो शक्स मिट्टी से अब बनते ही नहीं ,
जो बूजुर्गो के किस्से कहानी में सुनाई देते है ।
कितने सुर और साजो से भरी है दुनिया लेकिन ,
दीप को तो बस जलने के शोर सुनाई देते है ।
बनाते है जो रिश्ते दुनिया को सुन्दर ,
वो भला क्यूँ टूटने पर दर्द भरी तबाही देते है ।
जब गुनहग़ार खुद मसीहा हो ,
तो बेगुनाह किसको और क्यूँ सफाई देते है ।
खुदा का क्या , चन्द घंटो का धोखा खुशी दे देगा ,
दर्द उसे नहीं हो तो , जो चीजें पराई देते है ।
जिससे मिलना जिन्दगी की जरुरत हो ,
हालात क्यूँ बस उसकी ही जुदाई देते है ।
जिन जख़्मों के दर्द जीने की वजह हो ,
वक्त के मरहम , ऐसे जख्मो से रिहाई देते है ।
परख कर देखलें देने वाले की नीयत हम भी ,
देखें खुदा हम को अब कितनी खुदाई देते है ।
मिट्टी का बूत ना जाने कब रूह से जुदा हो जाये ,
हम को तो चलते फिरते चेहरे भी बेज़ान दिखाई देते है ।
क्यूँ खुदा देता नहीं रोशनी देने वाले कुछ ,
‘ दीप ‘ को क्यूँ बस अन्धेरे दिखाई देते है ।














महावीर said
आपकी इस काविश का हर एक पहलू दिल के अंदर टीस सी छोड़ देता है, हर शेर अपनी ज़िम्मेदारी निबाह रहा है, यही एक शा’इर की महानता का सबूत होता है।
बशीर बदर साहब का एक शेर याद आगयाः-
“ख़त ऐसा लिखा है कि नगीने से जड़े हों,
वो हाथ की जिसने कभी ज़ेवर नहीं देखा।”
(मैंने इस कलाम को ‘ग़ज़ल’ ना कह कर ‘काविश’ तक ही रखा है क्योंकि ‘बहर’ के मापदंड पर पूरी तरह नहीं उतर रही है। आपने यह बड़ा ही अच्छा किया है किस्वयं इसे ग़ज़ल ना कह कर एक खूबसूरत उन्वान (शीर्षक) दे दिया। इससे कुछ लोग जोग़ज़ल के नियमों की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं, व्यर्थ के वादविवाद में नहीं पड़ेंगे।)
सुंदर रचना के लिए बधाई।
hemjyotsana parashar said
धन्यवाद…
जी आपने सही कहा । ये ग़जल के कुछ नियमो को तोड़ रही है और इसी कारण इसे ग़जल नहीं कहा ।
आप को मेरी रचना अच्छी लगी जान कर खुशी हुई ।
कोशिश करती रहूँगी अच्छी रचनाऐं लिखती रहूँ ।
हेम ज्योत्स्ना पाराशर ” दीप “
mehhekk said
ab kya hakun sundar mere pas shabh apure hai
vkverma said
kaun kiska rakeeb hota hai
kauan kiska habeeb hota hai
ban jate hai sab se tallukkat
jaisa jiska naseeb hota hai.
mahakti rachana ke liye so many baskets of thanks.
Saif Qazi said
वाह आप का अंदाज़ बहुत खूबसूरत , दिल को छूने वाला है !! इतना प्यारा ब्लग शुरू करने के लिए मुबारकबाद कुबूल कीजिये !
Commenting on your blog is very difficult can you make it a little easy ?