उड़ना हवा में खुल कर लेकिन
Posted by hemjyotsana "Deep" on July 8, 2007
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।
मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाये रखना ।
दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
अपनी आँखों में अश्को को बचा कर रखना ।
मंज़िल को पाना जरुरी भी नहीं ,
मंज़िलो से सदा फासला रखना ।
सूरज तो रोज ही आता है मगर ,
अपने दिलो में ‘ दीप ‘ को जला कर रखना ।















September 12, 2007 at 12:46 pm
kya khub kahi
October 13, 2007 at 1:53 pm
bahut khoob zindgi ko dekhne ka nazaria pasand aaya,
December 3, 2007 at 10:15 am
zindagi aisi hi hai
January 10, 2008 at 9:19 pm
very nice……
March 21, 2008 at 1:58 pm
maashaaallah,kya khoob arj kiya hai!!!!!!!!!!!!
March 28, 2008 at 6:59 pm
मंज़िल को पाना जरुरी भी नहीं ,
मंज़िलो से सदा फासला रखना ।
June 24, 2008 at 4:49 am
‘उड़ना हवा में’ हिदायत और सकारातमक दृष्टिकोण लिए एक सुंदर रचना हैः
मरना जीना बस में कहाँ है अपने,
हर पल में ज़िन्दगी का लुत्फ उठाए रखना।