लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

मेरा परिचय

Posted by hemjyotsana "Deep" on July 8, 2007

उम-ऎ-दराज़ कट गई इम्तहान में ,
मेरा पता मिला मुझे उसके ज़हान में ।
काटें बरस कई इन्तजार में ,
उसका निशान मिला मुझे अपने मकान में ।

मेरा पुरा नाम हेम ज्योत्स्ना पाराशर ” दीप ” है । मैं एक Software Engineer हूँ । मै कोटा राजस्थान में रहती हूँ । कविता अपने लिये लिखती हूँ लेकिन औरों से बाटने में आन्नद मिलता है । प्रथम कविता कक्षा 11 ( 1999 ) में लिखी थी । तब से अब लिखती आ रही हूँ ।
बचपन से ही ज़गजीत सिंह जी की ग़ज़ले सुनती आई हूँ । ऊर्दू में रुचि है परन्तू ऊर्दू लिखने पड़ने में असमर्थ हूँ प्रयास जारी है ।

6 Responses to “मेरा परिचय”

  1. शैलेश भारतवासी Says:

    अपनी कविताएँ हिन्द-युग्म की यूनिकवि प्रतियोगिता में भी भेजें।

  2. सागर चन्द नाहर Says:

    स्वागत है हेम ज्योत्सनाजी आपका, उम्मीद है कि आपके चिठ्ठे के माध्यम से अच्छी कवितायें पढ़ने को मिलेगी।
    आपके शहर कोटा में हमारी एक और चिठ्ठाकारा/ कवियत्री डॉ गरिमा भी रहती है।
    अगर संपर्क करना चाहें तो कहिये। :)

  3. सागर चन्द नाहर Says:

    और हाँ हम भी आपकी ही तरह राजस्थानी (राजसमन्द जिले के देवगढ़ मदारिया गाँव से) हैं फिलहाल हैदराबाद में रहते हैं।

  4. manmohan parashar Says:

    aap bahut hi achi kavitayen lakhti hain

    thanku you

    manmohan parashar
    bhilwara - 311001
    09887051423
    09314051423

  5. sunil Says:

    apki poems mujhe bahut pasand aayee
    ummeed he aage bhi aap yu hi likhti rahengi
    meri subh kamnaye aapke sath he

  6. M.chouhan Says:

    aap ki kavit aachi lagi

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