मेरा परिचय
Posted by hemjyotsana "Deep" on July 8, 2007
उम-ऎ-दराज़ कट गई इम्तहान में ,
मेरा पता मिला मुझे उसके ज़हान में ।
काटें बरस कई इन्तजार में ,
उसका निशान मिला मुझे अपने मकान में ।
मेरा पुरा नाम हेम ज्योत्स्ना पाराशर ” दीप ” है । मैं एक Software Engineer हूँ । मै कोटा राजस्थान में रहती हूँ । कविता अपने लिये लिखती हूँ लेकिन औरों से बाटने में आन्नद मिलता है । प्रथम कविता कक्षा 11 ( 1999 ) में लिखी थी । तब से अब लिखती आ रही हूँ ।
बचपन से ही ज़गजीत सिंह जी की ग़ज़ले सुनती आई हूँ । ऊर्दू में रुचि है परन्तू ऊर्दू लिखने पड़ने में असमर्थ हूँ प्रयास जारी है ।















July 11, 2007 at 1:28 pm
अपनी कविताएँ हिन्द-युग्म की यूनिकवि प्रतियोगिता में भी भेजें।
July 15, 2007 at 7:41 pm
स्वागत है हेम ज्योत्सनाजी आपका, उम्मीद है कि आपके चिठ्ठे के माध्यम से अच्छी कवितायें पढ़ने को मिलेगी।
आपके शहर कोटा में हमारी एक और चिठ्ठाकारा/ कवियत्री डॉ गरिमा भी रहती है।
अगर संपर्क करना चाहें तो कहिये।
July 15, 2007 at 7:42 pm
और हाँ हम भी आपकी ही तरह राजस्थानी (राजसमन्द जिले के देवगढ़ मदारिया गाँव से) हैं फिलहाल हैदराबाद में रहते हैं।
July 21, 2007 at 6:54 pm
aap bahut hi achi kavitayen lakhti hain
thanku you
manmohan parashar
bhilwara - 311001
09887051423
09314051423
July 25, 2007 at 7:20 pm
apki poems mujhe bahut pasand aayee
ummeed he aage bhi aap yu hi likhti rahengi
meri subh kamnaye aapke sath he
November 28, 2007 at 1:26 pm
aap ki kavit aachi lagi