ये शहर मेरा………
Posted by hemjyotsana "Deep" on May 31, 2007
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी खुल के मिलते थे लोग यहाँ ,
अब मगर खुद से मिलने का भी वक्त कहाँ ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी बेज़ुबान पत्थर भी बात करते थे ,
अब मगर दोस्त भी अजनबी लगते है ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी खिला करता था बचपन की तरह ,
अब मगर बिखर गया है दरपन की तरह ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी बहारों का आशियाँ हुआ करता था ये ,
अब मगर पतझड़ के पेड़ सा लगता है ये ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी साथ रहते थे सब ,अकेला ना था कोई ,
अब मगर गये वक्त सा लौटा ही नहीं कोई ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
कभी होता था , जो होता था कभी ,
अब मगर इसे एक नया रगं देना है ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
आसमाँ भी वहीं है , हवा का ढ़गं भी वहीं है ,
बदलना है तो बस शहर के बाशिन्दो को ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
इसके जर्रों में फिर जिन्दगी को भरना है ,
इसको एक कल के साथ आज देना है ,
ये शहर मेरा धूप सा रंग बदलता ही रहा ।
पाया-खोया , अच्छा-बुरा जैसा भी ,
मेरा शहर मेरा है चाहे हो जैसा भी ।















December 1, 2007 at 5:32 pm
eisi hi to hoti hao duniya,
January 23, 2008 at 11:23 pm
KAMAL KA LIKTHIN HAIN AAP.
January 23, 2008 at 11:24 pm
WOW.TAT WAS GR8.KEEP IT UP PLZ