दीवाने का घर……..
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मई 29, 2007
चन्द दीवारें बनी अधूरी सी ,
छत बनते बनते रह गई ।
कुछ अधुरी उम्मीदें मेरी ,
मेरे अधुरे घर की कहानी कह गई ।
जल रहे है ख्वाब कुछ ,
और हवा सगं इनको उड़ा ले गई ।
कुछ तस्वीरें सजी थी , उनको भी,
वक्त की बारिश बहा कर ले गई ।
तारीफ तो करनी होगी ,
दरारों से भरी दीवारों की ,
जिन्दगी की आधीं ये ,
तन्हाई से सह गई ।
धूप के कुछ थपेड़ो से जैसे फिर जीनें लगी ,
यादों की छांव फिर चलने लगी रुकने लगी ।
सहर आयेगी नई फिर ,
जाते जाते रात में याद तेरी कह गई ।
इसे खण्ड़र कहता है कोई ,
तो कोई दीवाने का घर ,
कोई पागलखाना कहे ,
कोई अफसानो का घर ,
चन्द लम्हें जो बचे है ,
यही गुजरे तो बहत्तर हैं ।
जो भी है, जैसा भी है,
अधुरा ही सही मेरा घर है ।














mehhekk said
sach jaisa bhi hai adhura hi sahi apna ghar apna hota hai
vicky chawla said
gr8 work keep it up