कुछ पन्नों को छोड के अब
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मई 23, 2007
कुछ पन्नों को छोड के अब मुझको लिखना होगा ।
यंकी है मुझको , तुमको जा के फिर वापस आना होगा ।।
आयेगा जब जाकर के तू , आयेगा जब जाकर के तू ,
कितना कुछ होगा जो , तुझको मुझसे केहना होगा ।
लिख लुँगा मैं अपनी बातें पन्नों पर ही सारी ,
आकर तुझको मेरी बातें पन्नों से ही सुनना होगा ।
तुझ बिन जीवन , जान बिना कैसे बीता ,
मुझको जीना और तुझको बस सुनना होगा ।
साथ रहे बरसों हम , अब दूर भी रह कर देंखें ,
दूरी आने से रिश्ता ये , गहरा और गहरा होगा ।
छुटे हुए पन्नों की बातें पास तुम्हारे जा बैठी है ,
आते में लेते आना ,पन्नों पे फिर लिखना होगा ।














शैलेश भारतवासी said
आपका ब्लॉग अच्छा है। कविताएँ पढ़ना सुखद अहसास है।
mehhekk said
nice
ANIL SAXENA said
DIL KASH PESHKASH HAI.KEEP IT UP
Mahendra rajoriya said
kabhi bhi kisi ko nahi dekha mudke na jane kis rah par mile bo jab tak hi chalta rahoon main tum chaho to chalo mere saath