लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

लेंगे ना तेरा नाम…..

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मई 21, 2007

जब दास्तान हम कहेगे , करेगे तेरा भी  जिक्र  हम ,
मगर ना फिक्र कर तू ,लेंगे ना तेरा नाम तक  हम ।

सुनते रहे सबकी दिल की दास्तान हम ,
कहना सके अपना हाल-ऐ-दिल हम ।

अपने सभी अजनबी लगे , जो कहीं राह में मिलें ,
अभी घर से चले थे दो ही कदम हम ।

क्युँ वक्त बेरुखी से कटा, जब बात हर किसी से की,
रहते है खूब खुश जब मिलते है खुद से हम ।

शहरों में है हर किसी की कहानी एक सी ,
नयी जिन्दगी जीने चले गांवो की तरफ हम ।

जिन्दगी एक दिन में सिमट गई ऐसे ,
सुरज के सामने जलते रहे बन के “दीप” हम ।

hemjyotsana.wordpress.com

hemjyo.wordpress.com

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3 Responses to “लेंगे ना तेरा नाम…..”

  1. Nice one..

    शहरों में है हर किसी की कहानी एक सी ,
    नयी जिन्दगी जीने चले गांवो की तरफ हम ।
    - Beautiful lines

    जिक्र , फिक्र का शुद्ध रूप यह होना चाहिए ।

  2. धन्यवाद……..
    आप ने सही कहा
    जिक्र , फिक्र का शुद्ध रूप यही होना चाहिए ।
    परन्तु मेरे बहुत तलाश के बाद भी मे “क्र” लिखने में असमर्थ रही ।

    किन्तु अब मैंनें आप के font को copy paste कर के अपनी गलती को सुधार लिया है।
    सुधार कर वाने के लिये एक बार फिर से धन्यवाद।
    आशा है आप का सहयोग आगे भी बना रहेगा।

  3. yunus said

    जब दास्तान हम कहेगे , करेगे तेरा भी जिक्र हम ,
    मगर ना फिक्र कर तू ,लेंगे ना तेरा नाम तक हम ।

    इन दो लाइनों ने तो जेसे अन्दर तक हिला दिया मुझे वाकई बोहोत बढ़िया

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